बहुत सुलझा दिया है, वक्त ने हरकतें कर करके,
वरना एक वक्त था, की सारा वक्त गुजरता था हरकतों में !
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
20th अप्रैल 2018
बहुत सुलझा दिया है, वक्त ने हरकतें कर करके,
वरना एक वक्त था, की सारा वक्त गुजरता था हरकतों में !
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
20th अप्रैल 2018
मैं ग़मों को बेवकूफ़ बनाना सीख लिया, कहीं ऐसा तो नहीं की ज़िंदगी का तज़ुर्बा सीख लिया ! था बदतर अब बेहतर हो लिया, लगता है सच और झूँठ का अंतर समझ लिया !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
5th अप्रैल 2018
पुरुषार्थ और पुरुष के बीच एक घमासान क्यूँ चल रहा है भाई ?
आप पुरुष हैं न !
फ़िर क्योँ बेवज़ह प्रदर्शन किया जा रहा !
अपनी विचारधारा, अपनी व्यक्तिगत भड़ास तो नहीँ हो सकती न, दोनो किसी भी रूप में एक दूसरे की पूरक या समकक्ष भी तो नहीँ हैं ।
एक ऐसी हवा हमारे जोश मेँ क्योँ घुल रही है जो, बस बिना विचार किये, एक ऐसे लक्ष्य की ओर अग्रसर सी है, जिसे पाके भी सब कुछ खोने का भान होने वाला है। देश की नयी ऊर्जा को देश हित मे लगाना है, न की उसे खोना है।
सच के साथ, सच के पास, सच के लिये जीना ही सर्वश्रेष्ठ है,
सबसे पहले देश, फ़िर समाज, फ़िर परिवार, फ़िर आप स्वयं ॥
मेरे मन की आवाज़ ........
॥ जितेन्द्र शिवराज सिँह बघेल ॥
25th फ़रवरी 2018
किसी के वाश्ते जीना, किसी के वाश्ते मरना !
नहीँ होता नसीबों मे, यूँ मर मर के यूँ जीना !!
दफ़न होने से पहले ही, कफ़न की आरज़ू क्योँ थी !
कशिश वैसी अभी भी है, कशिश पहले भी जैसी थी !!
फरक इतना है बस आया, की तुझको पास हूँ पाया !
वफ़ा का वास्ता देकर, वफ़ा के पार मैं आया !!
किसी के वाश्ते जीना, किसी के वाश्ते मरना !
नहीँ होता नसीबों मे, यूँ मर मर के यूँ जीना !!
॥ जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल ॥
25 th फ़रवरी 2018
मैं हर चौराहे पर छेड़ी जाती हूँ, जहाँ विरोध किया वहाँ हरण कर ली जाती हूँ !
हर कदम कदम में रावण हैं, मैं पल पल अपना शील बचाती हूँ !!
मैं पहले भी अग्नि परीक्षा दी हूँ, इस युग में तो बचपन से देती आयी हूँ !
कब राम, रावण बन जाता है, इस भय से अब खुद को बचाती हूँ !!
मैं पाँच महान पतियों के समक्ष भी, चीर हरित हुई हूँ !
मैं महाभारत की वो द्रौपदी भी हूँ !!
कब कृष्ण कंस बन जायेगा, इस डर से अब डर जाती हूँ !!
मैं संशय थी तब भी, वही अब हूँ, मैं सीता हूँ, द्रौपदी हूँ, मैं नारी हूँ, फ़िर भी संशय हूँ !!
॥ विजय दशमी पर्व की मंगल शुभकामनाएँ ॥
जो रावण हैं वो अपना दहन कर लें, और जो राम हैं वो खुद का मीटर चेक कर लें !
जीतेंद्र शिवराज सिंह बघेल
30th सितम्बर 2017
भारत देश का सबसे विफल और लाचार मुख्यमंत्री आज़ तक के जीवन काल में मैने देखा तो वो हैं महामना Shivraj Singh Chouhan , शिक्षा के क्षेत्र में इतना लचर और असहाय प्रतीत होता प्रदेश का मुखिया मैं शायद कभी नहीँ देखा । विद्यालयों में अब तक नियमित तो दूर अतिथि शिक्षक तक नियुक्त नहीँ हो पाये इतनी बड़ी बात को ना कोई न्यूज़ चैनेल दिखा रहा न कोई दैनिक समाचार पत्र ।
इनको घोंसङा वीर कहना कोई अतिसँयोक्ति नहीँ होगी, जनता को उचित रोज़गार और बिजली पानी से फर्क पड़ता है, न की दिल से या मन की बात से नहीँ ।
प्रदेश की बेवक़ूफ़ जनता को बस ये मतलब है कि हमारा नाम गरीबी रेखा में होना चहिये, चावल तेल मुफ्त का चहिये, बाकी प्रदेश कितना पीछे जा रहा शायद समाज के एक विशेष तबके को इस से तनिक फ़र्क नहीँ पड़ता ।
दूसरा तबका है मुख्यमंत्री के चमचों का ये तबका बहुत ही प्रभावशाली और सक्रिय है, जिनमे जादातर रेत माफिया हैं ।
बहुत कुछ लिखने का मन है, अगला अगली कड़ी में !
🙏🙏🙏🙏
जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल
समय सब दिखाता है, किसी को पहले तो किसी को बाद में सिखाता है ।
जीवन और मरण की रगड़ में, मनुष्य घिसता चला जाता है ॥
कौन खुश होगा कौन नाराज़, इस कश्मकश में पिसता चला जाता है ।
समय सब दिखाता है, किसी को पहले तो किसी को बाद में सिखाता है ॥
कोई ख़ास से बकवास हो जाता है, कोई बकवास से ख़ास हो जाता है ।
सच का साथ दो तो, अपना भी पराया हो जाता है ॥
समय सब दिखाता है, किसी को पहले तो किसी को बाद में सिखाता है ।
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
7th अगस्त 2017
क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...