महफूज़ रखता हूँ खुद से बेहतर तुझको, न जाने फ़िर क्या ख़ता हो जाती है !
हूँ सलामत तो फक्र है मुझको, वरना किस्मत भी बदकिस्मत हो जाती है !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
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।। जगत विधाता मोहन।।
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