Wednesday, 23 July 2014

ज़िंदगी !!!!

तेरा आना ज़िंदगी में, कुछ ख़ास कर गया !
नहीं समझ सकता ज़िंदगी, तेरे जाने के बाद !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
23rd जुलाई 2014

Tuesday, 15 July 2014

क्यों फासले हमदर्द हैं !!!

क्यों फासले हमदर्द हैं, हमराह की अँखियों तले !
दिन रात हम रुसवा रहे, खुद के अँधेरे में जले !!
गर रौशनी कुछ दे सका, तो सुकर मत  करना मेरा !
मैं जल रहा मैं मिट रहा, सब कुछ तेरे यादों तले !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
    15th जुलाई 2014

Friday, 11 July 2014

!!!!! गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!!!

Saturday, 19 April 2014

कर्म !!

कुछ कर पाने से बेहतर है, कुछ  भी ऐसा न कर पाना !
अफ़सोस अगर हो करने से, तो मतलब क्या खोना पाना !!

है जल्दी में सारी दुनिया, उनको अपनों का मोह नहीं !
सब खोकर के पाना चाहें, उनको किंचित सा दर्द नहीं !!

सब जीवन ऐसे जीते हैं, जैसे उनको है रह जाना !
मरके उनको है ठौर कहा, ये राज किसी ने न जाना !!

कुछ कर पाने से बेहतर है, कुछ  भी ऐसा न कर पाना !
अफ़सोस अगर हो करने से, तो मतलब क्या खोना पाना !!
 

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
19 th अप्रैल 2014

Saturday, 18 January 2014

न जाने मुस्किले क्यों आज , मुझको बेवफा कर दीं ! 
उन्हें रुसवा करूं भी तो , मेरा मंजर बयां कर दीं !!

Saturday, 19 October 2013

जब साथ मेरे तू होती है !!

तू साथ मेरे जब होती है, हर राह क्यों मुमकिन लगती है !
ये बात बड़ी ही गहरी है, हर बात पे आहें भरती है !!
हर बात मुसाफिर लगती है, जब राह मेरी तू होती है !
किस बात का मुझको डर यारो, जब साथ मेरे तू होती है !!
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जितेन्द्र सिंह बघेल
                             19th Oct 2013

Friday, 16 August 2013

लम्हों की कसक !!

जाना चाहा था दूर बहुत, पर कदम मेरे अब टूट गये !
जिन रिश्तों का था नाज़ बड़ा, वो रिश्ते सारे टूट गये !!
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लम्हों की कसक बड़ी गहरी, मन को मानो झखझोर गयी !
हर दुआ में उसका नाम लिया, वो दुआ न जाने कहा गयी !!
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जिन हाथों में थे हाथ मेरे, वो हाथ अचानक छूट गये !
जिन रिश्तों का था नाज़ बड़ा, वो रिश्ते सारे टूट गये !!
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जितेन्द्र सिंह बघेल
17th अगस्त 2013

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...