Wednesday, 6 August 2014

हर मुश्किल को आँसा कर दू, बस हाथ मेरा तू थामे रख !
ये दौर बड़ा ही नाजुक है, बस कुछ पल का एहसास तू रख !!
सब रिश्तों की है  कदर मुझे, हर रिश्ते को मैं जीता हूँ !
बस कभी अकेले में होके, खुद की उलझन में रोता हूँ !!
ये दुनिया बड़ी बेगानी है, मैं समझ - समझ के हार गया !
बस इसमें कैसे रहना है, शायद मैं अब ये समझ गया !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
  06 अगस्त 2014

Friday, 25 July 2014

1
जब भी मिलोगी किसी मोड़ पे, हर मोड़  जिंदगी का नज़र आएगा  !
तेरे साथ चलना मुनासिब न था, मगर प्यार मेरा जता जायेगा !!
2
फलक से दूर तक कुछ भी नहीं था एक सिवा उसके !
बिना समझे, समझ बैठा, यही अफ़सोस है तबसे !!

फलक से दूर तक कुछ भी नहीं था एक सिवा उसके …
बिना समझे, समझ बैठा, यही अफ़सोस है तबसे .... 
JITENDRA SRS BAGHEL

Wednesday, 23 July 2014

ज़िंदगी !!!!

तेरा आना ज़िंदगी में, कुछ ख़ास कर गया !
नहीं समझ सकता ज़िंदगी, तेरे जाने के बाद !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
23rd जुलाई 2014

Tuesday, 15 July 2014

क्यों फासले हमदर्द हैं !!!

क्यों फासले हमदर्द हैं, हमराह की अँखियों तले !
दिन रात हम रुसवा रहे, खुद के अँधेरे में जले !!
गर रौशनी कुछ दे सका, तो सुकर मत  करना मेरा !
मैं जल रहा मैं मिट रहा, सब कुछ तेरे यादों तले !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
    15th जुलाई 2014

Friday, 11 July 2014

!!!!! गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!!!

Saturday, 19 April 2014

कर्म !!

कुछ कर पाने से बेहतर है, कुछ  भी ऐसा न कर पाना !
अफ़सोस अगर हो करने से, तो मतलब क्या खोना पाना !!

है जल्दी में सारी दुनिया, उनको अपनों का मोह नहीं !
सब खोकर के पाना चाहें, उनको किंचित सा दर्द नहीं !!

सब जीवन ऐसे जीते हैं, जैसे उनको है रह जाना !
मरके उनको है ठौर कहा, ये राज किसी ने न जाना !!

कुछ कर पाने से बेहतर है, कुछ  भी ऐसा न कर पाना !
अफ़सोस अगर हो करने से, तो मतलब क्या खोना पाना !!
 

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
19 th अप्रैल 2014

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...