Sunday, 21 June 2015

पितृ दिवस की सुभकामनाएँ !!






हर आशय को स्पष्ट करे, हर घूढ़ विषय का सार है जो ! 

माँ की ममता के परे भले, एक ढाल बना सा खड़ा है जो !!

है नमन दंडवत जग सारा, ऐसी प्रतिभा का धनी है जो !

 हर जनम रहो मेरे बनके , तुमसे बेहतर कोई और न हो  


पितृ दिवस की सुभकामनाएँ 
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
21st जून 2015 

हमने तो जी लिया !!!





बदतर से बेहतर होने में बीत जाती है ज़िन्दगी सारी !!


लोग कहते हैं, हमने तो जी लिया ………
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
21st  जून 2015 

Tuesday, 7 April 2015

7th अप्रैल 2015 !!

मैं हूँ उसमे भले थोड़ा, मगर एहसास ज्यादा है !
वजह बतला नहीं सकता, मेरा खुद से ये वादा है !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
7th अप्रैल 2015 

Sunday, 5 April 2015

5th अप्रैल 2015

जीवन में बहुत कुछ है करने को, 
बस शांति मिले करके यही काफी है !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
5th अप्रैल 2015 

Monday, 30 March 2015

तुम्हे जाना है जबसे दिल !!

तुम्हे जाना है जबसे दिल, धड़कता जोर से क्यों है !
जरा समझा करो इसको, सम्भलता देर से क्यों है !!
तुम्हे समझा नहीं पाता, कभी बतला  नहीं पाता !
मगर हर राज को कहके, सुकूं सा दिल में क्यों है !!
मेरे ताजे हालातों का, नहीं मुझपे असर होगा !
बिगड़ते को बनाने का, हुनर आता भी मुझको है !!
सबर रखना सबर करना, भरोसा है अगर मुझ पे !
ये दुनिया भी हसीं है अब, मिले हो तुम मुझे जबसे !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
30th मार्च 2015 

Wednesday, 15 October 2014

ज़रा सा हँस के देंखे अब !!!!


बहुत रोये तो क्या पाये, ज़रा सा हँस के देंखे अब ! 
कहा लौंटें, कहाँ जाएँ, ठिकाने भर चुके हैं सब !! 
किसी को पाके खोने का, गिला शिकवा नहीं है अब ! 
ज़माने भर की खुशियाँ भी, हंसा सकती नहीं हैं अब !! 
मगर जीने की राहों को, नहीं छीना किसी ने भी ! 
मुझे लगता है डरता है, जमाना भी कसम से अब !! 
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 जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
 16th अगस्त 2014

Thursday, 2 October 2014

तुझे देखूं तो लगता है !!!

तुझे देखूं तो लगता है, मेरी आँखें न रो डालें !
मैं डरता हूँ, मैं जलता हूँ, तेरा ये शौक न पालें !!
न देखूंगा, न सोचूंगा, न मानूंगा तुझे अपना !
अकेला ही मैं काफी हूँ, न देखूंगा कोई सपना !!
मेरी हर आरज़ू है अब, वफ़ा के नाम की जाना !
मैं ज़िंदा होके मरता हूँ, किसी ने ये नहीं जाना !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
2nd अक्टूबर 2014

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...