Monday, 30 March 2015

तुम्हे जाना है जबसे दिल !!

तुम्हे जाना है जबसे दिल, धड़कता जोर से क्यों है !
जरा समझा करो इसको, सम्भलता देर से क्यों है !!
तुम्हे समझा नहीं पाता, कभी बतला  नहीं पाता !
मगर हर राज को कहके, सुकूं सा दिल में क्यों है !!
मेरे ताजे हालातों का, नहीं मुझपे असर होगा !
बिगड़ते को बनाने का, हुनर आता भी मुझको है !!
सबर रखना सबर करना, भरोसा है अगर मुझ पे !
ये दुनिया भी हसीं है अब, मिले हो तुम मुझे जबसे !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
30th मार्च 2015 

Wednesday, 15 October 2014

ज़रा सा हँस के देंखे अब !!!!


बहुत रोये तो क्या पाये, ज़रा सा हँस के देंखे अब ! 
कहा लौंटें, कहाँ जाएँ, ठिकाने भर चुके हैं सब !! 
किसी को पाके खोने का, गिला शिकवा नहीं है अब ! 
ज़माने भर की खुशियाँ भी, हंसा सकती नहीं हैं अब !! 
मगर जीने की राहों को, नहीं छीना किसी ने भी ! 
मुझे लगता है डरता है, जमाना भी कसम से अब !! 
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 जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
 16th अगस्त 2014

Thursday, 2 October 2014

तुझे देखूं तो लगता है !!!

तुझे देखूं तो लगता है, मेरी आँखें न रो डालें !
मैं डरता हूँ, मैं जलता हूँ, तेरा ये शौक न पालें !!
न देखूंगा, न सोचूंगा, न मानूंगा तुझे अपना !
अकेला ही मैं काफी हूँ, न देखूंगा कोई सपना !!
मेरी हर आरज़ू है अब, वफ़ा के नाम की जाना !
मैं ज़िंदा होके मरता हूँ, किसी ने ये नहीं जाना !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
2nd अक्टूबर 2014

Thursday, 4 September 2014

रहमतों की फितरत !!!!

आसाँ नहीं है ज़िन्दगी, जिन्दादिलों की !
हर मोड़ पे एक, आदमखोर बैठा है !!
गुस्ताखियों से तो, आदत है बात करने की !
कोई गुस्ताख़ मेरे ताक में जो बैठा है !!
रहमतों की तो फितरत है, मुझे भूल जाने की !
कोई है जो, दुआओं में बात करता है !! 
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
4th सितम्बर 2014

Saturday, 30 August 2014

बड़ी सर्द थी दीवानगी उनकी !!!

बड़ी सर्द थी  दीवानगी उनकी, मैं मग़रूर था समझा नहीं !
ज़िल्लतों के दौर में पड़ा रहा, खुद को संभाला नहीं !!
सन्नाटे मुझे कहते हैं मेरी सुन,
उनसे कौन कहे, हम दीवाने हैं समझते नहीं !
अब तो खुद की ख़ामोशी भी कर गयी मोहब्बत मुझसे,
बस गुम  हूँ उसकी यादों में, निकल पाना मुमकिन नहीं !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
30th अगस्त 2014

Thursday, 28 August 2014

कुछ पल की बात !!

कुछ पल की बात थी, लगा यूँ सदियाँ गुजर गयीं !
वो बेसबर थे इस कदर, लगा तन्हाईयाँ भी मर गयीं !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
28th अगस्त 2014

Wednesday, 6 August 2014

हर मुश्किल को आँसा कर दू, बस हाथ मेरा तू थामे रख !
ये दौर बड़ा ही नाजुक है, बस कुछ पल का एहसास तू रख !!
सब रिश्तों की है  कदर मुझे, हर रिश्ते को मैं जीता हूँ !
बस कभी अकेले में होके, खुद की उलझन में रोता हूँ !!
ये दुनिया बड़ी बेगानी है, मैं समझ - समझ के हार गया !
बस इसमें कैसे रहना है, शायद मैं अब ये समझ गया !!
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जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
  06 अगस्त 2014

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...