Saturday, 7 March 2020
महिला दिवस 2020
Wednesday, 4 December 2019
।।औरत।।
कभी कोख में तो, कभी चौक में मैं।
क्यों मारी क्यों नोची, जली जा रही हूँ।।
किसी रोज़ हो जाऊं, गी जग से ओझल।
तो रहना अकेले, कहे जा रही हूँ।।
है डर का वो साया, हर एक पल जहन में।
ना जाने कहाँ मैं, मरी जा रही हूं।।
कभी कोख में तो कभी............
हैं रिश्ते ये नाते, हैं रीती रिवाजें।
उन्हें बस अकेले, जिये जा रही हूँ।।
हाँ मैं ही अकेली हूँ, जिम्मे सभी के।
सभी का सभी को, दिये जा रही हूँ।।
कभी कोख में तो कभी.............
अगर मैं ना होती, तो होता भला क्या।
तुम मर्दों को इतना, सहे जा रही हूँ।।
बसा लो गर दुनिया, हमारे बिना तुम।
तुम मर्दों को असली, कहे जा रही हूँ।।
कभी कोख में तो, कभी चौक में मैं।
क्यों मारी क्यों नोची, जली जा रही हूँ।।
जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल
०५ दिसंबर२०१९
आत्म ग्लानि से प्रेरित, मेरा हर शब्द आज के दौर में नारी के अपमान को दर्शाता है, हम किस समाज मे रहते हैं, किस धर्म के हैं इन सबसे परे है कि हम वास्तव में हैं क्या?
हम में और बाकी जीवों में बुध्दि का फर्क है विवेक शीलता है, अपने पराये पन का भान है, अच्छाई और बुराई की सच्चाई पता है।
मगर हमारे नैतिक मूल्यों में निरंतर जो गिरावट आ रही है वो कदाचित हमें पशुओं से भी निम्न स्तर की ओर ले जा रही है।
गंदगी हमारे मानसिकता में है वरना शारीरिक बनावट तो सबकी एक समान होती है।।
Sunday, 24 November 2019
॥ हे प्रभू मेरे ॥
Saturday, 2 November 2019
दिवालिया
Thursday, 31 October 2019
संस्कृति मंत्रालय (भारत)
संस्कृति मंत्रालय (भारत)
Thursday, 24 October 2019
बेख़बर...
Saturday, 12 October 2019
॥ एक आंकलन॥ 12/11/199
आजकल सरकारी क्षेत्रों और संस्थाओं के निजीकरण की खबरें आ रहीं हैं, हैरानी की बात तो ये है जिनका बचपन से लेकर जवानी तक निजीकरण में ही निर्मित हुआ है, फ़िर चाहे वो शिक्षा, चिकित्सा या कोई भी क्षेत्र वो लोग़ भी ज्ञान बघार रहें हैं.....
तत्कालीन सरकार अपनें देश हित में कार्य कर रही है, और आगे भी करेगी, जिनको लगता है की प्रधान मंत्री एक्टिंग करते हैं या जान बूझकर सब दिखावे के लिये करते हैं तो ऐसा सोंचने वाले तुम भी ऐसी एक्टिंग करो इसी बहाने अनजाने में ही सही देश के कुछ काम आओगे, आज़ मोदी जी ने महाबलीपुरम में क्या एक्टिंग की है, बीच में कचरा उठाने की है ना....
सभी से अनुरोध है पहली एक्टिंग यही से शुरू करो, रोज़ अपनें आसपास सुबह सुबह डेली यही करो, यकीन मानों अपनें मोहल्ले के सूपर स्टार बन जाओगे और ख़ुद के भी।
हम अगर किसी के प्रशंशक हैं या धुर विरोधी, दोनों ही स्थिति में आपको दोनों के बारे में बराबर जानना अत्यंत आवश्यक है, बिना किसी को जाने, बिना उसके बारे में पढ़े, आप एक अनजान और अनपढ़ जैसा बर्ताव कर जाते हैं, जो अपनें आप में ख़ुद का उपहास होता है और कुछ नहीं।
हमारी डिगरी का हमारे संस्कारों से कोई लेना देना नहीं है, जो ये वजन लेकर चल रहें कृपया हल्के हो जाये, तुरन्त ये वजन उतार फेंके।
हमारा सामजिक जीवन क्या है ये हम नहीं सामने वाला मूल्यांकित करता है, और हमें जो ख़ुद को गलत लगे ऐसा ब्यौहार हम दूसरे से ना करें।
एक आंकलन.....
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
।। जगत विधाता मोहन।।
क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...
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पाठ - 14 " पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कहना मानो ! 3- अधिक...
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तू जैसी थी वैसी आज भी है, मेरा हर रोम तेरा मोहताज़ आज भी है !! कभी भटका जो राहों में, तो रुखसत होती है यूँ, पलट के कहती है मुझसे , ...
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कुछ बचा नहीं है करने को, मन में है एक अपराध बोध ! है यही सोंच कर मन व्याकुल, जीवन से बड़ा न कोई बोझ !! कुछ लोग मिले जीवन में क्यों, ह...