Wednesday, 1 May 2013

मन की बातें !!!!

वो मन की बातें जान सकें, कुछ ऐसी काश खुदाई हो !
हम हर मंजर सह जायेंगे, फिर चाहे बाद जुदाई हो !!
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सारा जीवन ही झोंक दिया, हमने उनको अपनाने में !
फिर भी न जाने तनहा हैं, कुछ भूल हुई अनजाने में !!
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कुछ बात लगी हैं शूल मुझे, शायद उनको एहसास न हो !
है बात मगर कुछ ऐसी ही, शायद उनको अफ़सोस न हो !!
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वो मन की बातें जान सकें, कुछ ऐसी काश खुदाई हो !
हम हर मंजर सह जायेंगे, फिर चाहे बाद जुदाई हो !!
















जितेन्द्र सिंह बघेल 
2nd जून 2013

Monday, 29 April 2013

ज़िन्दगी के मायने !!!!!

ज़िन्दगी के मायने समझ न सका, लोग मुझको बुरा ही समझने लगे !
हैं मोहब्बत मेरी, जो लगे अब दुआ, लोग उसमे भी ऊँगली उठाने लगे !!

मेरी हिम्मत का लोहा न लेना कभी, मेरे अरमाँ न जाने बहकने लगे !
बस लगी टीस मुझको कसम से सनम, मेरे अपने पराये से लगने लगे !!
काश लब्जों का लहजा समझ पाते वो, जो धड़कन से पहले धड़कने लगे !
ज़िन्दगी के मायने समझ न सका, लोग मुझको बुरा ही समझने लगे !
जितेन्द्र सिंह बघेल
 29th अप्रैल 2013

Friday, 19 April 2013

उल्फत !!

तुझे खोने के डर से मैं, न जाने क्यों डरा सा हूँ !
किसी को खो दिया मैंने, किसी को पा लिया सा हूँ !!

मेरे किस्से मोहब्बत के, मुझे जीने नहीं देंगे !
खुदी की ही निगाहों में, खुदी से गिर गया हूँ मैं !!

ये उल्फत है या जिल्लत है, उसे बतला नहीं सकता !
मगर अपनी वफाओं का, सिला भी पा चूका हूँ मैं !!

 
19 अप्रैल  2013
जितेन्द्र सिंह बघेल

Friday, 12 April 2013

बस माँ का आँचल !!

हैं मौत से पहले मुझे, कुछ ख्वाहिशों की रहमतें !

मरके मिले बस माँ का आँचल, और न हों उल्फतें !!



जितेन्द्र सिंह बघेल
12 अप्रैल 2013

Thursday, 28 March 2013

अपनापन - परायापन !!

हमने सुना था, की  अपने कितने भी पराये क्यों न हो जाएँ,
मगर अपनापन नहीं जाता !

मगर यहाँ तो कुछ और बात दिखी यारो, इतना परायापन मिला,
की साला बताया नहीं जाता !!
  


जितेन्द्र सिंह बघेल

28 मार्च 2013

Thursday, 21 March 2013

हो एक दृष्टि, हो एक डगर !!

 हो एक दृष्टि, हो एक डगर मानो सारा जग अपना है !
निज स्वार्थ सिद्ध के खातिर जो, लुट जाये वो क्या अपना है !!

ए वतन तुझे है नमन मेरा, मर मिटू तुझी पे सपना है !
हो एक दृष्टि, हो एक डगर मानो सारा जग अपना है !!

जितेन्द्र शिवराज  सिंह बघेल 
21 मार्च 2013

Monday, 11 March 2013

जलता हूँ जज्बातों में !!!!!!!


जलता हूँ जज्बातों में, मत पूँछ मेरे अफसानो को !
हर मंजर मुझसे रूठा है, है जीवन जैसे जाने को !!

हर किस्सा मेरा अपना ही, क्यों आज मुझी से पूंछे है !
है वक़्त बड़ा बेदर्दी सा, सब कुछ है जैसा खोने को !!

उन राहों में जब जाता हूँ, हर मंजर मुझसे कहता है !
क्यों आँखें तेरी नम सी हैं, तू चाहे जैसे रोने को !!

जितेन्द्र सिंह बघेल
12th मार्च 2013

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...