Friday, 16 August 2013

लम्हों की कसक !!

जाना चाहा था दूर बहुत, पर कदम मेरे अब टूट गये !
जिन रिश्तों का था नाज़ बड़ा, वो रिश्ते सारे टूट गये !!
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लम्हों की कसक बड़ी गहरी, मन को मानो झखझोर गयी !
हर दुआ में उसका नाम लिया, वो दुआ न जाने कहा गयी !!
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जिन हाथों में थे हाथ मेरे, वो हाथ अचानक छूट गये !
जिन रिश्तों का था नाज़ बड़ा, वो रिश्ते सारे टूट गये !!
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जितेन्द्र सिंह बघेल
17th अगस्त 2013

Wednesday, 26 June 2013

तू याद कभी न फिर आये !!!!!!!!!

जब साथ नहीं चल सकते थे तो, राह में मेरे क्यों आये !
हर जख्म अकेले सहते थे, तुम मरहम बनकर क्यों आये !!

मेरे ज़ज्बात बेगाने हैं, जो शायद हद से पार गये !
हैं मगर आज सर्मिन्दा हम, जो शायद तुम से हार गये !!

तेरे दुःख की बख्शीशों में, हमने अपना सुख वार दिया !
ये बात गलत क्यों लगे मुझे, की मैंने तुझसे प्यार किया !!

हूँ आज अभी तक वैसा ही, जैसा मैं पहले होता था !
वो दौर आज फिर लौटा है , जैसे मैं पहले रोता था !!

हो गयी वफ़ा क्यों आज खफ़ा, शायद ये वक़्त कभी आये !
बस दुआ यही है यार मेरे, तू याद कभी न फिर आये !!

जब साथ नहीं चल सकते थे तो, राह में मेरे क्यों आये !
हर जख्म अकेले सहते थे, तुम मरहम बनकर क्यों आये !!
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जितेन्द्र सिंह बघेल
27th जून 2013

Monday, 17 June 2013

जिल्लत !!!


न उल्फ़त में जीना आया,  न जिल्लत में मरना आया !
बड़ी कमबख्त हैं,  ये दुनिया के रश्में,
न उन्हें रोना आया,  न हमे रुलाना आया !!
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जितेन्द्र  सिंह बघेल
17th जून 2013

Wednesday, 1 May 2013

मन की बातें !!!!

वो मन की बातें जान सकें, कुछ ऐसी काश खुदाई हो !
हम हर मंजर सह जायेंगे, फिर चाहे बाद जुदाई हो !!
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सारा जीवन ही झोंक दिया, हमने उनको अपनाने में !
फिर भी न जाने तनहा हैं, कुछ भूल हुई अनजाने में !!
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कुछ बात लगी हैं शूल मुझे, शायद उनको एहसास न हो !
है बात मगर कुछ ऐसी ही, शायद उनको अफ़सोस न हो !!
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वो मन की बातें जान सकें, कुछ ऐसी काश खुदाई हो !
हम हर मंजर सह जायेंगे, फिर चाहे बाद जुदाई हो !!
















जितेन्द्र सिंह बघेल 
2nd जून 2013

Monday, 29 April 2013

ज़िन्दगी के मायने !!!!!

ज़िन्दगी के मायने समझ न सका, लोग मुझको बुरा ही समझने लगे !
हैं मोहब्बत मेरी, जो लगे अब दुआ, लोग उसमे भी ऊँगली उठाने लगे !!

मेरी हिम्मत का लोहा न लेना कभी, मेरे अरमाँ न जाने बहकने लगे !
बस लगी टीस मुझको कसम से सनम, मेरे अपने पराये से लगने लगे !!
काश लब्जों का लहजा समझ पाते वो, जो धड़कन से पहले धड़कने लगे !
ज़िन्दगी के मायने समझ न सका, लोग मुझको बुरा ही समझने लगे !
जितेन्द्र सिंह बघेल
 29th अप्रैल 2013

Friday, 19 April 2013

उल्फत !!

तुझे खोने के डर से मैं, न जाने क्यों डरा सा हूँ !
किसी को खो दिया मैंने, किसी को पा लिया सा हूँ !!

मेरे किस्से मोहब्बत के, मुझे जीने नहीं देंगे !
खुदी की ही निगाहों में, खुदी से गिर गया हूँ मैं !!

ये उल्फत है या जिल्लत है, उसे बतला नहीं सकता !
मगर अपनी वफाओं का, सिला भी पा चूका हूँ मैं !!

 
19 अप्रैल  2013
जितेन्द्र सिंह बघेल

Friday, 12 April 2013

बस माँ का आँचल !!

हैं मौत से पहले मुझे, कुछ ख्वाहिशों की रहमतें !

मरके मिले बस माँ का आँचल, और न हों उल्फतें !!



जितेन्द्र सिंह बघेल
12 अप्रैल 2013

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...