Friday, 4 September 2015

अनुरोध विनोद न मानो प्रभु !!

अनुरोध विनोद न मानो प्रभु , मन माहि चले हैं विरोध कई !
   है प्रीति समाज की रीति भले, पर प्रीति की रीति न माने कोई !!
कुछ कष्ट करें दुर्बल मन को, मन को ही बता दो उपाय कोई !
तन मन अपना  अर्पण कर दूँ , धन की चिंता ना रहे कोई !!
मझधार से पार लगा दो प्रभु, यहाँ और नहीं मल्हार कोई !
अनुरोध विनोद न मानो प्रभु , मन माहि चले हैं विरोध कई !

      !! कृष्ण जन्म की मंगल सुभकामनाएँ !!
       * हरे कृष्णा हरे रामा *

  जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
   5 सिंतम्बर 2015 

Thursday, 3 September 2015

खुदा खुदगर्ज लगता है !!

कोई मंजर नहीं ऐसा, जो मुझको दे सुकूँ थोड़ा !
न जाने किस गली में वो, मुझे तकती खड़ी होगी !!
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अचानक याद में उसके, मचल जाता हूँ मैं थोड़ा !
सबर करना मेरे हमदम, वो दिल से कह रही होगी !!
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खुदा खुदगर्ज लगता है, रहम करता नहीं थोड़ा !
मगर फिर भी इबादत वो, खुदा की कर रही होगी !!
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सभी राहें हुई आशां, मगर फिर भी है डर थोड़ा  !
यही सज़दा खुदा से वो, दुआ में कर रही होगी !!
              🌹🌹🌹 
              ♥♥♥
          जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
                3 सितम्बर 2015 

Saturday, 15 August 2015

15 अगस्त 2015 !!!!

कर बात आज एक तू, जिए - मरे, डरे नहीं  !
भले कटे अनेक सर, मगर कभी झुके नहीं !!
हो आन बान शान ही, वतन की जो, वही तेरी !
पुकार दे, दहाड़ दे, यही स्वतंत्रता तेरी !!
लिया जनम यहीं तो है, मरेगा भी यहीं पे तू !
ना देख धुप छाँव अब, बढ़ा कदम, चलेगा तू !!
है देश आज जल रहा, बुझा नहीं सके कोई !
सब सेंकते हैं रोटियां, उन्हें नहीं हया कोई !!
तू चीर दे दीवार को, तू फाड़ दे पहाड़ को !
तू मोड़ दे तूफान को , तू सह सभी प्रहार को !!
है मात्र एक जीव तू, यही समझ के कर्म कर !
वतन की आबरू तेरी, यही समझ के जश्न कर !!
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक सुभकामनाएँ 
    !! जय हिन्द - जय भारत !!

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 

   15 अगस्त 2015 

Monday, 10 August 2015

मुझे पता नहीं !!

कभी जागते हुए सोता हूँ, कभी सोते हुए जगता हूँ....... 
इस हुनर को क्या नाम दूँ , मुझे पता नहीं !!
कभी सब होके, कुछ नहीं होता,
कभी कुछ नही होके सब होता है ..... 
इस एहसास को क्या नाम दूँ , मुझे पता नहीं !!
कभी आँखे खुली होते, कुछ देख नहीं पाता,
कभी शांत बैठे , कुछ सुन नहीं पाता …… 
इस मनःस्तिथी को क्या नाम दूँ , मुझे पता नहीं !!
कभी बहुत छोटी ख़ुशी , खुश कर जाती है,
कभी बहुत बड़ी भी , कम पड़ जाती है …
इस अंतरव्यथा को क्या नाम दूँ , मुझे पता नहीं !!
मैं जो कर रहा वो सही है , 
या जो सही है वो कर रहा .... 
क्या इसे ज़िन्दगी नाम दूँ , पता नहीं !!
♥♥♥♥
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
  10th अगस्त 2015 

Sunday, 2 August 2015

मन से अपराध ना हो जाए !!!!

मन से अपराध ना हो जाए ,
बस यही सोंच के बैठे थे  !
एक बात अचानक हो ही गयी,
जिस बात को लेके डरते थे  !!
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है व्याकुल और विक्षिप्त सा मन,
बस हाथ हाथ से मलते थे !
हर बार वही हो जाता है, 
जो कभी न हो ये कहते थे !!
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आदत बेचारी बेबस थी,
फितरत न बने हम डरते थे !
एक बात अचानक हो ही गयी,
जिस बात को लेके डरते थे  !!
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     मन से अपराध ना हो जाए.……… 

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 

   3rd अगस्त 2015 

Sunday, 21 June 2015

पितृ दिवस की सुभकामनाएँ !!






हर आशय को स्पष्ट करे, हर घूढ़ विषय का सार है जो ! 

माँ की ममता के परे भले, एक ढाल बना सा खड़ा है जो !!

है नमन दंडवत जग सारा, ऐसी प्रतिभा का धनी है जो !

 हर जनम रहो मेरे बनके , तुमसे बेहतर कोई और न हो  


पितृ दिवस की सुभकामनाएँ 
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
21st जून 2015 

हमने तो जी लिया !!!





बदतर से बेहतर होने में बीत जाती है ज़िन्दगी सारी !!


लोग कहते हैं, हमने तो जी लिया ………
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
21st  जून 2015 

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...