Saturday, 19 January 2013

यादों का मौसम

कुछ लम्हे हूँ जिया हुआ,  जिनकी यादें तडपाती हैं !
है बीते पल में जिंदा वो, बस यही याद कहलाती है !!

यादों का मौसम कैसा है, जो दूर कभी ना जाता है !
जब याद उसे मैं करता हूँ, मन दूर तलक यूँ जाता है !!

है बेबस सा लाचार बड़ा, मन को यादें समझाती हैं !
एक आश बची है मन में क्यों, आँखें  नम सी  हो जाती हैं !!

कुछ लम्हे हूँ जिया हुआ,  जिनकी यादें तडपाती हैं !
है बीते पल में जिंदा वो, बस यही याद कहलाती है !!



             जितेन्द्र सिंह बघेल 
            19 January 2013

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