मेरी बातें भी अब उनको लगे हैं, जुल्म सी साहेब !
मेरा दिल भी बेचारा है, हुआ न अब तलक वाकिफ !!
उन्हें तो आदतें सी हैं, सनम का दिल जलाने की !
बेचारी आदतों को अब, कोई समझाये क्या साहेब !!
जितेन्द्र सिंह बघेल
5th दिसम्बर 2012
Wednesday, 5 December 2012
Friday, 23 November 2012
सफ़र जिंदगी का !!!!
ये सफ़र जिंदगी का कटता नहीं क्यों,
न जाने इसे क्यों जिए जा रहे हैं !!
जो लम्हे सुहाने लगे थे कभी,
जिन्हें भूल जाना मुनासिब नहीं है !!
न पूंछो मेरी ज़िन्दगी के सफ़र को,
कई गलतियों को छुपाये हुए हैं !!
वो गलती गुनाहों सी लगने लगी क्यों,
जिन्हें दिल में अब तक छुपाये हुए हैं !!
ये सफ़र जिंदगी का कटता नहीं क्यों,
न जाने इसे क्यों जिए जा रहे हैं !!
जितेन्द्र सिंह बघेल
24th नवम्बर 2012
न जाने इसे क्यों जिए जा रहे हैं !!
जो लम्हे सुहाने लगे थे कभी,
जिन्हें भूल जाना मुनासिब नहीं है !!
न पूंछो मेरी ज़िन्दगी के सफ़र को,
कई गलतियों को छुपाये हुए हैं !!
वो गलती गुनाहों सी लगने लगी क्यों,
जिन्हें दिल में अब तक छुपाये हुए हैं !!
ये सफ़र जिंदगी का कटता नहीं क्यों,
न जाने इसे क्यों जिए जा रहे हैं !!
जितेन्द्र सिंह बघेल
24th नवम्बर 2012
Thursday, 1 November 2012
स्त्री का दिल !!!!!
स्त्री का दिल इकलौता ऐसा मुल्क है
जहां मैं दाख़िल हो सकता हूं बग़ैर किसी पासपोर्ट के
कोई पुलिसवाला नहीं मांगता
मेरा पहचान-कार्ड
न ही लेता है तलाशी
उलट-पुलट कर मेरे सूटकेस की
जिसमें ठूंस - ठूंस कर भरी गई हैं
ग़ैरक़ानूनी ख़ुशियां
प्रतिबन्धित कविताएं
और रसीली तकलीफ़ें
स्त्री का दिल इकलौता ऐसा मुल्क है
जो ज़खीरे नहीं बनाता मारक-हथियारों के
न ही झोंकता है अपने लोगों को
लड़ने के लिए
ख़ुद की छेड़ी लडाइयां
Tuesday, 9 October 2012
तेरी चाहत !!!!
तेरी चाहत बनी राहत, मेरे वीरान मंजर की !
तेरा आना मुकद्दर में, यूँ ही किस्मत नहीं होती !!
अभी तक सोंचता हूँ मैं, सभी बातें मोहब्बत की !
तू मुझसे दूर है कहना, मेरी हिम्मत नहीं होती !!
खुदी से कहकहे कहना, मेरी आदत है रातों की !
मेरी साँसे भी अब जाना, मुसलसल भी नही होती !!
जितेन्द्र सिंह बघेल
09 सितम्बर 2012
तेरा आना मुकद्दर में, यूँ ही किस्मत नहीं होती !!
अभी तक सोंचता हूँ मैं, सभी बातें मोहब्बत की !
तू मुझसे दूर है कहना, मेरी हिम्मत नहीं होती !!
खुदी से कहकहे कहना, मेरी आदत है रातों की !
मेरी साँसे भी अब जाना, मुसलसल भी नही होती !!
जितेन्द्र सिंह बघेल
09 सितम्बर 2012
Friday, 5 October 2012
मेरी उलफतें !!!!!
न जाने उलफतें भी अब, मुझे तड़पा नहीं पातीं !
उन्हें अफ़सोस होता है, मुझे समझा नहीं पाती !!
मैं बुजदिल भी नहीं हूँ ये, उन्हें समझा नहीं सकता !
उन्ही का हो चूका हूँ मैं, मुझे बतला नहीं पाती !!
कोई हमदर्द था मेरा, यही एहसान है उनका !
मेरी उलफत बेगानी हैं, मुझे अपना नहीं पातीं !!
!! जितेंद्र सिंह बघेल !!
5th सितम्बर
उन्हें अफ़सोस होता है, मुझे समझा नहीं पाती !!
मैं बुजदिल भी नहीं हूँ ये, उन्हें समझा नहीं सकता !
उन्ही का हो चूका हूँ मैं, मुझे बतला नहीं पाती !!
कोई हमदर्द था मेरा, यही एहसान है उनका !
मेरी उलफत बेगानी हैं, मुझे अपना नहीं पातीं !!
!! जितेंद्र सिंह बघेल !!
5th सितम्बर
Thursday, 13 September 2012
मैं और वो !!!!
बड़ा मशगूल सा हूँ मैं, यहाँ कुछ लोग कहते हैं !
मुझे मालुम नहीं की क्यों, मुझे बदनाम करते हैं !!
किसी की याद में खोना, बड़ा मुश्किल उन्हें लगता !
जिसे है खो दिया पहले, उसे ही याद करते हैं !!
मुझे मालुम नहीं की क्यों, मुझे बदनाम करते हैं !!
किसी की याद में खोना, बड़ा मुश्किल उन्हें लगता !
जिसे है खो दिया पहले, उसे ही याद करते हैं !!
Tuesday, 4 September 2012
मेरे मार्गदर्शक मेरे शिक्षक !!!!
मैं जो कुछ भी हूँ आज, उन्ही के क़र्ज़ के कारण !
नहीं मैं कर रहा होता, यहाँ कुछ और भी धारण !!
मेरा हर जन्म भी कम है, जिसे चुकता नहीं सकता !
नया जीवन दिया उसने, जिसे मैं कर रहा धारण !!
मेरी हर राह में था वो, नहीं छोड़ा अकेला भी !
यहाँ तक आ गया हूँ मैं, उसी एक सख्स के कारण !!
कभी मन जब हुआ व्याकुल, उसे बस याद हूँ करता !
मिटा देता है सब उलझन, मेरे अरमान के कारण !!
कभी भटका जो राहों में, पकड़ के हाथ कहता है !
तू चलता जा मेरे बच्चे, मैं ही तो हूँ तेरा तारण !!
"शिक्षक दिवस की हार्दिक सुभकामनाएँ "
जितेन्द्र सिंह बघेल
5 सितम्बर 2012
नहीं मैं कर रहा होता, यहाँ कुछ और भी धारण !!
मेरा हर जन्म भी कम है, जिसे चुकता नहीं सकता !
नया जीवन दिया उसने, जिसे मैं कर रहा धारण !!
मेरी हर राह में था वो, नहीं छोड़ा अकेला भी !
यहाँ तक आ गया हूँ मैं, उसी एक सख्स के कारण !!
कभी मन जब हुआ व्याकुल, उसे बस याद हूँ करता !
मिटा देता है सब उलझन, मेरे अरमान के कारण !!
कभी भटका जो राहों में, पकड़ के हाथ कहता है !
तू चलता जा मेरे बच्चे, मैं ही तो हूँ तेरा तारण !!
"शिक्षक दिवस की हार्दिक सुभकामनाएँ "
जितेन्द्र सिंह बघेल
5 सितम्बर 2012
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क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...
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तू जैसी थी वैसी आज भी है, मेरा हर रोम तेरा मोहताज़ आज भी है !! कभी भटका जो राहों में, तो रुखसत होती है यूँ, पलट के कहती है मुझसे , ...
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कुछ बचा नहीं है करने को, मन में है एक अपराध बोध ! है यही सोंच कर मन व्याकुल, जीवन से बड़ा न कोई बोझ !! कुछ लोग मिले जीवन में क्यों, ह...

