मेरी बातें भी अब उनको लगे हैं, जुल्म सी साहेब !
मेरा दिल भी बेचारा है, हुआ न अब तलक वाकिफ !!
उन्हें तो आदतें सी हैं, सनम का दिल जलाने की !
बेचारी आदतों को अब, कोई समझाये क्या साहेब !!
जितेन्द्र सिंह बघेल
5th दिसम्बर 2012
Wednesday, 5 December 2012
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।। जगत विधाता मोहन।।
क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...
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