Sunday, 6 October 2024

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ,
मेरा जगत विधाता मोहन...
सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है।
आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।
छोड़ सभी अब बाह्य द्वंद को, अंतरद्वंद का कर दो दोहन..
क्यों डरना जब हांक रहा रथ,
मेरा जगत विधाता मोहन...
पांच गांव की आश लिए, वो पांच पांडव भटके थे।
था क्या किसी कौरव को अनुभव, वो सब घमंड में अटके थे।।
जब जग छोड़े तो वो जोड़े, उसका विराट है सम्मोहन...
क्यों डरना जब हांक रहा रथ,
मेरा जगत विधाता मोहन...

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
 6th October 2024
            इंदौर 

Friday, 27 September 2024

।।पक्ष और विपक्ष।।

दोनो पक्षों में शामिल होकर, क्या हासिल कर पाओगे।
एक दिन ऐसा आएगा, कहीं नही रह पाओगे।।
होना चाहो रक्षित तुम तो, खुद का बेड़ा पार करो।
खुद से खुद के द्वंद से मानुष, जल्दी से तुम मुक्त करो।।
बर्बरीक से सीखो कुछ, क्यों कृष्ण ने उसका हाल किया।
कुछ सीखो कर्ण महादानी से, क्यों कृष्ण ने उसको वीर कहा।।
हरगिज़ रहना तत्पर तुम, सहने को निंदा बाणों को।
निंदक ही गढ़ते हैं तुमको, जीवन में आगे बढ़ने को।।
पर पक्ष विपक्ष के अंतर को, समझ बूझ के ही बढ़ना।
जिस कारण पशु से उपर हो, वो कर्म नित्य ही तुम करना।।


जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
   28 सितंबर 2024
      शुभ प्रभात 
    🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Wednesday, 25 September 2024

।।विरह वेदना।।

सोने का मृग चाहिए तो, विछड़न भी होगा जान प्रिये।
कर्तव्य परायण होना तो, उपहास का भान भी जान प्रिये।।
कुछ भी कहके जाये कोई, प्रतिउत्तर को भी खोज प्रिये।
वरना चढ़ने को अग्निवेदि में, तत्पर रहना तुम सीघ्र प्रिये।।
सीधी सीढ़ी अब नही रही, टेढ़ा होना भी सीख प्रिये।
खुद की ज्वाला में खूब जली, अब ज्वाला बन तू जला प्रिये।।
कपट, दंभ के बादल हैं, बरबस उनको बरसा तू प्रिये।
तेरी गर्जन में वो बल है, हरगिज़ इसको बिसरा न प्रिये।।
मरना अब रावण तेरे से, तू कूटनीति भी सीख प्रिये।
अब राम बिना भी जीवन है, इस जीवन को जीना है प्रिये।।

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
 26 सितंबर 2024

Wednesday, 18 September 2024

आज की पीढ़ी का मर्म

देखता हूं कुछ नौजवानों को,
अक्सर उनकी टोपी उड़ जाया करती है रास्ते में।
थोड़ा आगे रोकते हैं, 
अपनी अजीब सी बाइक, 
की उठा सकें अपनी गिरी टोपी,
मगर रौंद जाता है कोई कमबख्त हरहजा उसे ।।
देखता हूं कईयों को सेल्फ (बिना किक मारे स्टार्ट होना) वाली रॉयल इनफील्ड में भी।
कभी रास्ते में हुई ख़राब तो पैर नहीं थाम पाते,
कौन समझाए इन झींगुरों को,
की बड़ा होना पड़ता है भारी भरकम को संभाल पाने के लिए।।
देखता हूं बीस लाख की मोटर कार वालों को भी।
बीस रुपए के टोल के लिए बकर करते,
उनको अपनी औकात से अपनी ही औकात में गिरते।।
जो छोटा है वो बड़ा होने का दावा किए जा रहा है,
क्या मसला है कि, खुद के जहर को दवा समझे जा रहा है।
मिलावट सी हो गई है हर नस्ल में अब,
किसे इस्तेमाल करें, किस पर विश्वास करें,
सब कुछ बस धोखा हुआ जा रहा है।।

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
सितंबर 2024

Tuesday, 23 May 2023

।। मेरे शहर में सब है ।।

मेरे शहर में सब है,
बस नही है तो, वो महक...
जो सुबह होते ही, मेरे गांव के हर घर से आती थी।
थोड़ी सोंधी, मटमैली, जो अंतर्मन में घुल जाती थी।।
मेरे शहर में सब है,
बस नही है तो, वो महक...
जो मेरे मां के आंचल से आती थी।
थोडा रसोई, थोडा दूध मक्खन,
इनकी महक तो मां ने ही बताई थी।।
मेरे शहर में सब है,
बस नही है तो, वो महक...
जो बारिश की बूंदों के पड़ने से आती थीं।
घर की छप्पर पर फैले, कद्दू और लौकी की बौलें,
लगता था की पास बुलाकर, खुद को सुंघाती थीं।।
मेरे शहर में सब है,
बस नही है तो, वो महक...
जो बियारी के लिए तैयार होते चूल्हों से आती थीं।
सुबह सुबह गोबर से लीपी दीवारें भी, पास बुलाती थीं।।
मेरे शहर में सब है,
बस नही है तो, वो महक...

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
  24th मई 2023


Friday, 12 May 2023

।।कर्नाटक विधानसभा चुनाव २०२३।।

तबायफें भी होंगी, मंडियां भी सजेंगी ।
बिकेंगे विधायक, बलि राजनीती की चढ़ेंगी ।।
होगा चीरहरण मर्यादा का, कई द्रोपादियां भी होंगी।
रहेंगे कौरव, रहेंगे पांडव, भीष्मों की आंखे फिर भी बंद होंगी ।।
तबायफें भी होंगी, मंडियां भी सजेंगी ।
बिकेंगे विधायक, बलि राजनीती की चढ़ेंगी ।।

#karnatakaelection2023 
#karnatakaassemblyelection2023 

Thursday, 11 May 2023

।। रास्ते।।

कहीं से आ रहा था मैं,
कहीं से जा रहा था मैं ।
जो पहले थी मेरी मंजिल,
वहीं से जा रहा था मैं ।।
हजारों रास्ते तय कर,
निरंतर चल रहा हूं मैं ।
हजारों रास्ते जिनको,
बिछड़ कर रो रहा हूं मैं ।।
कहीं से आ रहा था मैं.......
यही चकिया है जीवन का,
यही अपना रहा हूं मैं ।
बहुत ही कम समय मे मैं,
अधिक सा खो रहा हूं मैं।।
कहीं से आ रहा था मैं.......

।।जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल।।

।। पुंज।।

मैं धर्म से अधर्म तक की, प्रार्थना का पुंज हूँ !
मैं व्यक्ति हूँ, विशेष हूँ, मनुष्य हूँ, मनुष्य हूँ !!
सभी चराचरों का मैं, श्रेष्ठतम वो बिंदु हूँ !
जिसे नहीँ धरा का मोह, विनाश का वो द्वन्द हूँ !!
मैं मन्दिरों की घंट से, निकल रहा वो स्वर भी हूँ !
मैं मस्जिदों से आ रही, अजान का भी राग हूँ !!
हूँ एकमात्र श्रेष्ठ मैं, सृजन से अब भी शीर्ष हूँ !
हूँ बुद्धि से प्रखर बहुत, विवेक का मैं शंकु हूँ !!
मैं भूल कर हूँ बढ़ रहा, जिस ब्रह्म का मैं अंश हूँ !
मैं लालची मैं दुष्ट हूँ, मैं ही कपट मैं दंभ हूँ !!
मैं धर्म से अधर्म तक की, प्रार्थना का पुंज हूँ !
मैं व्यक्ति हूँ, विशेष हूँ, मनुष्य हूँ, मनुष्य हूँ !!
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हम मनुष्य जाति समस्त ब्रह्मांड की सर्वोच्च चर अचर इकाई हैं, परंतु हम अपने ज्ञान और विवेक के दम्भ में चूर होके निरंतर मानवता के ही विनाश कि ओर बढ़ रहे, प्रकृति से हमने जंग छेड़ दी है, अपने ही अपनों के रक्त के प्यासे हैं, कदाचित थोड़ा भी भान होता कि ईश्वर ने हमें किसलिये बनाया है, क्यों बुद्धि प्रदान कि, इसलिये कि उसकी ही सत्ता के विरुद्ध युद्ध शुरू करदें !!
🙏
जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल
     1st मई 2017

।। मैं।।

यूँ तो हूँ अभ्यष्यत मैं, हूँ तनिक अनभिज्ञ भी !
राह में हूँ घुस चला, फ़िर नही डर मात्र भी !!
हैं हज़ारों द्वेष और, हैं करोड़ों कपट भी !
लड़ रहा हूँ मैं निरंतर, थक नहीँ सकता कभी !!
बुद्धि होती नित प्रखर, हैं कर्म मेरे रत अभी !
मन हो रहा नित प्रति प्रफुल्लित, है नहीँ थकना कभी !!
यूँ तो हूँ अभ्यष्यत मैं, हूँ तनिक  अनभिज्ञ भी !
राह में हूँ घुस चला, फ़िर नही डर मात्र भी !!
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
28th अप्रैल 2017

Thursday, 14 April 2022

की कौन राम से पूछेगा...

की कौन राम से पूंछेगा, पुरूषों से पुरुषोत्तम हो जाना।
की कौन राम से जानेगा, मर्यादा में ही रह जाना।।
जो राजतिलक को जाता हो, और एक क्षण में  वनवास मिले।
की कौन राम से पूछेगा, संघर्षों में ही ढल जाना।।
की कौन राम सा हो पाया, जिसने सबरी के बेर लिए।
की कौन राम सा बन पाया, जिनसे कितने उद्धार हुए।।
की कौन राम सा अग्रज है, जो भरत, लक्ष्मण अनुज हुए।
की कौन राम सा आतुर है, जिसका सेवक हनुमान मिले।।
की कौन स्वयं से पूछेगा, कितना खुद को वह पहचाना।
की कौन स्वयं में देखेगा, कितना प्रभु को मैंने जाना।।
सब रावण बन कर फिरते हैं, नित रोज धर्म को डसते हैं,
की कौन स्वयं से पूछेगा, क्या राम सरल है बन जाना।

जारी है.......
जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल 
  १५ अप्रैल २०२२

Tuesday, 15 February 2022

।।जीने की वजह।।

अपने Emotions का Investment किए जा रहा हूं।
किसी के लिए शायद Permanent हुए जा रहा हूं।।
Expenses जिंदगी के बढ़ रहे हैं दिनो दिन।
लगता है जीने की वजह Extend किए जा रहा हूं।।
होना है एक दिन Exipre ही सबको।
बिना मतलब खुद को Inspire किए जा रहा हूं।।

Sunday, 26 April 2020

🙏🙏🙏🙏

किसे पता है सन्नाटों के पसरे सन्नाटों का स्वर।
किसे पता है मन मैं उठते घबराते ख़्वाबों का ज्वर।।
जीवन और मरण दोनों का किंचित भय जब रहे नहीं।
तभी समझिये होना है कुछ जो अबतक है हुआ नहीं।।
मन मौन साध के बैठा है सब सब क्लेश त्याग के बैठा है।
नयनों का मोह लिए प्राणी खुद में कैदी के जैसा है।।
नही किसी को भान तनिक प्रकृति की प्रकृति बता पाये।
अगली करवट क्या होगी अब सब धरा धरा न रह जाये।।
इन सन्नाटों से मैत्री का कैसा व्यवहार व्यवस्थित हो।
हर सन्नाटे की पीड़ा का कोई उपचार सुनिश्चित हो।।

जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल
  26th अप्रैल 2020

Friday, 24 April 2020

।जय श्री राम।

तुम राम हो तुम धर्म हो, तुम ही दया का भान हो।
तुम पुत्र पति और पिता भाई, के प्रबल प्रमाण हो।।
ब्रह्मांड के भीतर या बाहर, हो सका कोई और ना।
हो जिसे सब धर्म संगत, आजतक कोई हुआ ना।।
ओज तुममें, तेज तुममें, तुम गुणों के खान हो।
तुम राम हो तुम धर्म हो, तुम ही दया का भान हो।।
है राम का बस नाम ऐसा, जो धरा को धरे है।
ब्रह्मण्ड को सिंचित करे जो, कष्ट सारे हरे है।।
शिव की समाधि में रहें, वो श्रेष्ठ तारक राम हो।
तुम राम हो तुम धर्म हो, तुम ही दया का भान हो।

आगे है..……..

जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल

रामायण जीवन का आधार, एक संकलन लेकर मैं राम को, उनके त्याग को उनके धर्म परायण होने को लेकर कुछ लिखने का प्रयास किया है आने वाले समय मे और लिखूंगा।

वर्तमान में रामानंद सागर कृत रामायण का पुनः प्रसारण सही मायनों में बहुत उत्तम कार्य है, जीवन की इस भागदौड़ में हम जैसे कई लोगों ने इस कृति को नही देखा था, रामायण पढ़ना अलग बात है अपितु उसे सचित्र देखना मानो ऐसा प्रतीत होता है जैसे सब कुछ सीधा अंतर्मन में उतर रहा है।

Saturday, 7 March 2020

महिला दिवस 2020

एक लड़की
एक बहन
एक औरत
एक पत्नी
एक माँ
और न जाने कितने अनगिनत रिश्तों को जीने वाली ये प्रजाति ब्रह्मांड की वो शक्ति है जिसे आप शब्दों में नही बता सकते, जिसे आप किसी से तुलना नही कर सकते न ही आप उस जैसा कोई और उत्पन्न कर सकते।
एक मर्द की अगर सच्चे मायने में मर्द है तो उसे हर स्त्री का सम्मान करना आना चाहिए।

आज अगर मैं इस खुले सोशल मीडिया मंच से कुछ मर्दो से ये पूंछना चाहूँ की मर्द शब्द को परिभाषित करिये तो शायद उनको गूगल गुरु या किसी लोकल गुरु की आवश्यकता पड़ सकती है, क्यों?

क्योंकि वो मर्द शब्द को सैदव एक अक्खड़पन और उद्दंड शब्द के समानार्थी पाए हैं, हमारा समाज मर्द और स्त्री के अन्तर को शायद मिटा पाने में असफल रहा है ऐसा मेरा खुद का मानना है।
हमारी सोंच औरत के प्रति केवल रसोई तक सीमित है क्या?
अगर मैं कहूँ हां चलिए सही है तो वहाँ भी उसे गलत ही माना जाता है, धोके से रसोई में यदि नमक हल्दी की मात्रा ज्यादा होइ तो इसी सोशल मीडिया के ८०% प्रतिशत मर्द वहाँ अपनी मर्दानगी दिखा देंगे, बिना जाने बिना सोंचे।
(कुछ जगह अपवाद होते हैं लेकिन उनकी संख्या तुच्छ है- औरतों के लिए)

कभी कोई उस लड़के से पूंछे जिसने अपना बचपन ही बिना माँ के बिता दिया, कभी कोई उस भाई से पूंछे जिसकी कलाई आज तक तरस रही कि कोई कलाई भर दे, कभी उस अधेड़ उम्र मर्द से पूंछे की उसका जीवन कैसे कटेगा और कभी कोई उम्र के आखिर पड़ाव में बेबस बुजुर्ग से पूंछे की आपका बचा टाइम कैसे कटेगा?
ये प्रश्न ऐसे हैं जो कदाचित नेत्रों को नमी देते हैं, मगर वहीं अनायास सोंचने पे विवश करते हैं।

सम्मान

ये शब्द ऐसा है जितना दोगे दुगुना मिलेगा।
फिर चाहे इंसान हो या जानवर।

मैं अपने अबतक के जीवन काल में लगभग बहुत स्थानों में रहा हूँ सालों साल वहा जीवन यापन किया, सही मायनों में 15-20 स्थान बदल दिया जहाँ आज भी मेरे खास लोग हैं खुद के बनाये, लेकिन हर उस स्थान में इंसान से पहले मेरे जानवर दोस्त हुए, क्यों?
क्योंकि जानवर से बेहतर सम्मान का मतलब इंसान कभी नहीं समझ सकता।

इस घटना का बखान करने का कारण यही था कि अगर हम इंसान हैं और जानवर से खुद को बेहतर मानते हैं तो कुछ तो इंसानो वाली हरकते करें, अपने घर से इसकी शुरुआत करें देखते देखते ये समाज की पंरपरा बन जाएगी।

।यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते, रमन्ते तत्र देवता।

ये मैं स्कूल में 10 वी की संस्कृति में पढ़ा था।



महिला दिवस की ब्रह्मांड की समस्त महिलाओ को अनेक अनेक सुभकामनाये
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल
 8th मार्च 2020 रविवार

Wednesday, 4 December 2019

।।औरत।।

कभी कोख में तो, कभी चौक में मैं।
क्यों मारी क्यों नोची, जली जा रही हूँ।।
किसी रोज़ हो जाऊं, गी जग से ओझल।
तो रहना अकेले, कहे जा रही हूँ।।
है डर का वो साया, हर एक पल जहन में।
ना जाने कहाँ मैं, मरी जा रही हूं।।
कभी कोख में तो कभी............
हैं रिश्ते ये नाते, हैं रीती रिवाजें।
उन्हें बस अकेले, जिये जा रही हूँ।।
हाँ मैं ही अकेली हूँ, जिम्मे सभी के।
सभी का सभी को, दिये जा रही हूँ।।
कभी कोख में तो कभी.............
अगर मैं ना होती, तो होता भला क्या।
तुम मर्दों को इतना, सहे जा रही हूँ।।
बसा लो गर दुनिया, हमारे बिना तुम।
तुम मर्दों को असली, कहे जा रही हूँ।।
कभी कोख में तो, कभी चौक में मैं।
क्यों मारी क्यों नोची, जली जा रही हूँ।।

जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल
   ०५ दिसंबर२०१९

आत्म ग्लानि से प्रेरित, मेरा हर शब्द आज के दौर में नारी के अपमान को दर्शाता है, हम किस समाज मे रहते हैं, किस धर्म के हैं इन सबसे परे है कि हम वास्तव में हैं क्या?
हम में और बाकी जीवों में बुध्दि का फर्क है विवेक शीलता है, अपने पराये पन का भान है, अच्छाई और बुराई की सच्चाई पता है।
मगर हमारे नैतिक मूल्यों में निरंतर जो गिरावट आ रही है वो कदाचित हमें पशुओं से भी निम्न स्तर की ओर ले जा रही है।
गंदगी हमारे मानसिकता में है वरना शारीरिक बनावट तो सबकी एक समान होती है।।

Sunday, 24 November 2019

॥ हे प्रभू मेरे ॥

हे प्रभू मेरे, हर जाओ दुःख..
अब जीवन को स्थिर करदो। 
कर्मों की गहन परीक्षा कर..
परिणाम में भी, परिणिति करदो॥ 1
दे जाऊं मैं, इतना जग को..
जग याद करे और हर्षित हो। 
कर जाऊं इतना बेहतर मैं..
परिवार मेरा ना पीड़ित हो॥ 2
हे प्रभू मेरे....................
हूँ किंचित मात्र, तुच्छ अतिशय..
मुझ पर अपनी अब कृपा करो। 
सब जीवों पे हो दया मूझे..
ऐसा मुझमें सद्गुण भर दो॥ 3
हे प्रभू मेरे....................
न द्वेष रहे न, न ईर्ष्या हो..
लालच और कपट हटा भी दो। 
करुणा ही करुणा हो मन में..
अपमान का भान हटा भी दो॥ 4
हे प्रभू मेरे....................
जाऊं जब अंतिम पथ को मैं..
तो साथ मेरे जड़ चेतन हों। 
थोड़ा भी कष्ट न दे जाऊं..
हे प्रभु मेरी ये विनय सुनो॥5
हे प्रभू मेरे, हर जाओ दुःख..
अब जीवन को स्थिर करदो। 
कर्मों की गहन परीक्षा कर..
परिणाम में भी, परिणिति करदो॥6


      ॥ राधे राधे॥ 

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
   25 नवंबर 2019

Saturday, 2 November 2019

दिवालिया

हो सकूँ दिवालिया तो निकाल दूँ दीवाला तन्हाइयों का..
कमबख्त ये कुर्क नहीं, सुर्ख हुई जा रहीं हैं। 
हर रोज़, हर पल एक बखेड़ा खड़ा रहता है इनका..
पल पल जिन्दगानियाँ अब इनके नाम हुई जा रहीं हैं॥
काश! हो जाऊं बेख़बर और कुछ करूं इनका...
मगर एक पल में ही, धड़कनें रुकी जा रहीं हैं।
हो सकूँ दिवालिया तो निकाल दूँ दीवाला तन्हाइयों का....
कमबख्त ये कुर्क नहीं, सुर्ख हुई जा रहीं हैं॥ 

जितेन्द्र शिवराज सिंह बघेल
   3rd  नवंबर 2019

Thursday, 31 October 2019

संस्कृति मंत्रालय (भारत)


 श्री मान आदरणीय 

संस्कृति मंत्रालय (भारत)


विषय :- माँ शारदा मन्दिर घाटी डोंगरी बनचाचर, वि.स. क्षेत्र ब्योहारी में हो रही अनियमितता के संबन्ध में निवेदन पत्र।
महोदय,
सादर विनम्र अनुरोध यह है कि शहडोल जिले के प्रचीन से प्राचीनतम शक्ति पीठों में से एक विषयांकित शारदा देवी का मन्दिर जिला मुख्यालय से 70 कि.मी. की दूरी पर शहडोल से रीवा मार्ग(राष्ट्रीय), राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ रोड पर मसीरा से 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित है l
1-    यह है कि उपरोक्त मन्दिर को जन - सहयोग से जो खंडहर के रूप में था, वर्ष 2003 से स्थानीय समिति बनचाचर सार्वजनिक चंदे से मन्दिर का नव निर्माण वर्ष 2015 में पूर्ण किया जा चुका है।
2-    यह है कि, मन्दिर में आने वाले चढ़ावे व दान पात्र कि राशि का सही व सुचारू रूप से मन्दिर के कार्य में उपयोग हो इस कारण से वर्ष 2016 में श्री मान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जयसिंहनगर व लोक पंजीयक के यहाँ लोक न्यास हेतु स्थानीय समिति द्वारा प्रस्तुत किया गया।
3-    यह है कि, पंजीयक जयसिंहनगर (अनुविभागीय अधिकारी) द्वारा विधि के अनुरूप दावा व आपत्ति मँगायी गयी व वाद - विचार दिनांक 21 मई 2018 को माँ शारदा देवी मन्दिर घाटी डोंगरी को लोक न्यास की श्रेणी में आदेश पारित किया गया।
4-    यह है कि, कुछ अलगाववादी ताकतों के द्वारा मन्दिर कि सम्पति को खुर्द बुर्द करने कि शाजिस चल रही है व उनके द्वारा चढ़ावे कि राशि अपने निजी उपयोग में कि जा रही है, जिसकी सूचना श्री मान अनुविभागीय अधिकारी, लोक पंजीयक व तहसीलदार जयसिंहनगर को दी गयी किन्तु उनके द्वारा आजतक कोई कार्यवाही नहीं की गयी।
5-    यह है कि, ट्रस्ट का गठन हुए डेढ़ वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है किंतु नयी कार्यकारिणी को आजतक उसका प्रभार नहीं सौंपा गया है, जिस कारण से मन्दिर में होने वाले धार्मिक कार्यो व नव निर्माण में विराम लगा हुआ है।
                                              अस्तु जनप्रिय लोकप्रिय  मुख्यमन्त्री जी मध्य प्रदेश से विनम्र हाथ जोड़कर निवेदन है कि मन्दिर में स्थापित दान पेटी को शील कराने व अन्य चढ़ावे में आने वाले सोने चांदी की वस्तु राजस्व अमले की निगरानी में संपन्न कराए जाने की महती कृपा की जायेगी तथा पिछले तीन साल से ट्रस्ट में जा चुके इस मन्दिर का अभी तक चढ़ावे की राशि व आभूषणों का कोई भी हिसाब क़िताब नहीं है, जो सबके समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इसी आशा व विश्वास के साथ यह आवेदन पत्र संप्रेषित है ॥

                                                                                                         सादर
                                                                                               शिवराज सिंह
                                                                                                   अध्यक्ष
                                                                                शारदा मन्दिर ट्रस्ट घाटी डोंगरी बनचाचर

Thursday, 24 October 2019

बेख़बर...

मैं हर ख़बर से बेख़बर सा हूँ..
कहीं मैं दर बदर तो नहीं। 
बड़ी गुस्ताख हो रहीं यादें..
बेइंतहा तुम्हे भूलती ही नहीं॥ 
मैं मगरूर था अपनें कड़कपन पर..
दर्द को कभी समझा नहीं। 
कुछ पल अकेला जो हुआ..
रो बैठा कुछ सूझा नहीं॥ 
हर एक एहसास को समझू..
जिन्हें पहले समझा ही नहीं। 
हरेक आहट से  आहत हूँ..
लगा कहीं तुम तो नहीं॥
            (1)

जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल 
  25 अक्टूबर 2019


जारी है....

Saturday, 12 October 2019

॥ एक आंकलन॥ 12/11/199

आजकल सरकारी क्षेत्रों और संस्थाओं के निजीकरण की खबरें आ रहीं हैं, हैरानी की बात तो ये है जिनका बचपन से लेकर जवानी तक निजीकरण में ही निर्मित हुआ है, फ़िर चाहे वो शिक्षा, चिकित्सा या कोई भी क्षेत्र वो लोग़ भी ज्ञान बघार रहें हैं.....
तत्कालीन सरकार अपनें देश हित में कार्य कर रही है, और आगे भी करेगी, जिनको लगता है की प्रधान मंत्री एक्टिंग करते हैं या जान बूझकर सब दिखावे के लिये करते हैं तो ऐसा सोंचने वाले तुम भी ऐसी एक्टिंग करो इसी बहाने अनजाने में ही सही देश के कुछ काम आओगे, आज़ मोदी जी ने महाबलीपुरम में क्या एक्टिंग की है, बीच में कचरा उठाने की है ना....
सभी से अनुरोध है पहली एक्टिंग यही से शुरू करो, रोज़ अपनें आसपास सुबह सुबह डेली यही करो, यकीन मानों अपनें मोहल्ले के सूपर स्टार बन जाओगे और ख़ुद के भी।
हम अगर किसी के प्रशंशक हैं या धुर विरोधी, दोनों ही स्थिति में आपको दोनों के बारे में बराबर जानना अत्यंत आवश्यक है, बिना किसी को जाने, बिना उसके बारे में पढ़े, आप एक अनजान और अनपढ़ जैसा बर्ताव कर जाते हैं, जो अपनें आप में ख़ुद का उपहास होता है और कुछ नहीं।
हमारी डिगरी का हमारे संस्कारों से कोई लेना देना नहीं है, जो ये वजन लेकर चल रहें कृपया हल्के हो जाये, तुरन्त ये वजन उतार फेंके।
हमारा सामजिक जीवन क्या है ये हम नहीं सामने वाला मूल्यांकित करता है, और हमें जो ख़ुद को गलत लगे ऐसा ब्यौहार हम दूसरे से ना करें।

एक आंकलन.....
जितेंद्र शिवराज सिंह बघेल

।। जगत विधाता मोहन।।

क्यों डरना जब हांक रहा रथ, मेरा जगत विधाता मोहन... सब कुछ लुट जाने पर भी, सब कुछ मिल जाया करता है। आश बनी रहने से ही, महाभारत जीता जाता है।।...